बुधवार, 14 सितंबर 2022

शायरी

 हमने कहा ,आज न जीने की तमन्ना है और न मरने का इरादा है,

  वे बोले कम से कम दूसरा तो पूरा कर ,यह प्लान तो आधा आधा है।

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हमने कहा,मुड़ मुड़ के न देख मुड़ मुड़ के ,

 उन्हे नहीं मालूम आगे है नाली ,

 उन्होंने हमें न देखने की ही कसम खा ली।

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इस दुनिया से मुझे हरदम ही मिला ,

 गम तो ज्यादा,पर सुकून कम ही मिला।

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बड़े मासूम बनकर वो कत्ल करते हैं ,

 बड़ी भोली सी अपनी शक्ल रखते हैं।

  देखते हैं  वो इधर ना उधर ,

   हर काम बड़े बेवक्त करते हैं ।

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 तुम आगाज तो करो अंजाम हम कर देंगे,

  तुम कोरा कागज दो शब्दों से हम भर देंगे।

 हमारा जीना तो क्या जीना,

  यह जिंदगी तुम्हारे नाम कर देंगे। 

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आज कुछ तो नया नहीं होगा,

 कोई अफसाना बयां नहीं होगा।

 उम्र तो उम्र है हावी होगी ही,

 कभी कोई बुजुर्ग जवां नहीं होगा।

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अक्सर अमृत के बदले जहर उगलते हैं लोग,

 अंदर से होते काले सफेद दिखते हैं लोग।

  अब हमने तो ज़हर पीने की आदत ही बना ली,

    हमारी इस आदत से जलते हैं लोग।

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 बहुत की तूने बेवफाई ए सनम।

 हम भी तेरी नजरों में गिरके रहेंगे।

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हम भला किसी से क्यों डरेंगे।

 जो करना है वह करके रहेंगे।।

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दुनिया ने हमको भला बनने न दिया।

     अब तो हम बुरे ही बनके रहेंगे ।।

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कमबख्त नींद तो हमें आ ही गई होती, 

  गर तेरी यादों ने न घेरा होता ।

 उदासियों का घर न होता ,

 गमों का न डेरा होता।

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