# विषय- ख्वाब में चाशनी में डूब रहा था- -
स्वरचित-
सतीश गुप्ता'पोरवाल',मानसरोवर, जयपुर ।
सुना है कुछ पैसे आ जाते हैं तो,
लोग दूध से नहाते हैं ।
और ज्यादा पैसा आता है तो,
लोग घी से नहाते हैं।
हमारी तो है मिठाई की दुकान,
तो हमने भी बना लिया एक प्लान।
दूध और घी से नहाने वालों को बताएंगे,
हम यहां चासनी में नहाएंगे।
तो हम गुलाब जामुन से भरे
कड़ाहे में उतर गए ।
पानी की तरह मुंह में भर ,
कुल्ला करना था लेकिन निगल गए।
स्विमिंग पूल की तरह अठखेलियां करते रहे,
और बीच-बीच में गुलाब जामुन भी गटकते रहे।
चीटियों का एक रेला हमारी तरफ आ रहा था,
इतना बड़ा गुलाब जामुन जो पहली बार देखा था।
हम घबरा कर बाहर निकले
हड़बड़ी में फर्श पर ही फिसले।
दुकान के लड़के को हमने बोला,
अबे देखे मत ज्यादा मत सोच।
जल्दी-जल्दी कपड़ा लाकर ,
निगोड़ी चासनी को पोंछ।
ख्वाब में मैं ,
चासनी में डूब रहा था।
नींद खुली तो मुझे चाट,
श्वान मजा लूट रहा था।
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