बुधवार, 28 सितंबर 2022

आईना --कहानी

 नरेश को सरकारी नौकरी में इतना वेतन मिल ही जाता था कि घर खर्च के अलावा कुछ बचा भी लेता था।

  कुछ वर्षों पश्चात उसने 100 वर्ग गज का एक भूखंड खरीद कर मकान बना लिया। बस्ती बनी रहे इसलिए 'गेराज पोर्शन' में एक कमरा भी बना लिया। नरेश के साथ उसकी पत्नी,एक बेटा व मां, साथ ही रहते थे।

 वक्त के साथ बेटा बड़ा हो गया और नरेश को उसकी पढ़ाई-लिखाई के लिए अलग कमरे की जरूरत महसूस हुई, तो नरेश ने 'गेराज पोर्शन' वाला कमरा खाली करवा दिया। उसने अपनी पत्नी को कहा की मां को उस बगल वाले कमरे में रख देते हैं और यह कमरा बेटे के काम आ जाएगा। उसकी पत्नी ने कहा कि अच्छा हुआ हमने वह कमरा बनवा लिया। अब वह माताजी के लिये काम आ जाएगा। 

 बेटे ने जब यह बात सुनी तो उसने कहा कि पापा सही है, ऐसा कमरा समय पर काम आ जाता है।मैं भी जब मकान बनाऊँगा तो उसमें भी ऐसा ही कमरा बनाऊंगा ताकि आप लोग जब बूढ़े हो जाओगे तो आप लोगों को उस कमरे में रख सकूं।

  यह सुनते ही जैसे नरेश और उसकी पत्नी पर घड़ों पानी पड़ गया।उनको अपनी गलती महसूस हुई और जैसा करना चाह रहा था वैसा नहीं किया। 

सही कहा है कि "कब कोई बदल जाए- कब आईना सामने आ जाए।"

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