अपने बारे में सोच जरा ,
दुनिया की फिक्र में है पड़ा।
नरम बहुत है दिल तेरा,
तू चाहेगा करना भला।
पर वह नहीं हिचकिचायेगा,
तेरे साथ भी करना बुरा।
मन तो तेरा निश्चल है,
जैसे पारदर्शी और स्वच्छ जल।
पर तू क्या जाने इस दुनिया में,
दिलों में भरा कितना छल।
कितना कुछ औरों को दिया,
बस दिया ही दिया नहीं लिया।
जितना जैसा मिला तुझे,
उतने में ही बस गुजारा किया।
दुनिया में सिर्फ गैर ही नहीं,
अपने भी कोई कम नहीं।
अपनों को खूब दिया और,
इसका तुझको गम नहीं।
लेकिन अपने बारे में भी तो सोच,
क्या करना है यह भी तो खोज।
अपने लिए भी कुछ कर ले,
वरना तो पछतायेगा एक रोज।
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