छू कर तुम्हें गुजरना हवा का,
निशब्द कर जाता है मुझे।
क्या गुजर जाती है तब मुझ पर,
यह कैसे पता होगा तुझे।
एक नजर ही तो देखा था तुझे,
तब से मुझ में जग उठी थी तेरी चाह।
तेरे दिल तक पहुंचने की ढूंढ रहा था,
कोई तो होगी बस एक तो राह।
छोटी सी गुजारिश है तुझ से,
एक नजर से उठाकर देख ले जरा।
दिल में मेरे कैसे तूफान उठ रहे,
तुझे तो कैसे मालूम होगा भला।
तुझे छू कर आती है जो हवा,
उस हवा की महक मुझे महका जाती है।
तुझसे मिलने की जो चाहत है,
मेरे दिल को वो बहका जाती है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें