गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

लत शराब की- कविता

 यह क्या हालत हो गई जनाब की ,

जबसे लग गई है लत शराब की। 

 अब तो जब देखो झूमते रहते हैं,

 इसी लत ने तो हालत खराब की। 

नशा तो हर कोई करना चाहता है 

 पर जरूरी नहीं कि वह पीना चाहता है।

कोई चाहता है ज्यादा डिग्री हासिल करना, 

 कोई ज्यादा से ज्यादा धन कमाना चाहता है। 

किसी को ज्यादा से ज्यादा डींगें हांकना है,

 किसी को हवा में भी बातें करना है।

 हर किसी की अपनी अपनी आदत है 

 किसी काम को शिद्दत से करना ही तो  लत है।

 काम करना है जमाने में तो ऐसा करो, 

 कि असफलता से तुम कभी ना डरो। 

 लत करो तो ऐसी कि जमाने में मिसाल बन जाओ, 

  लेकिन मेरे भाई  लत शराब की कभी न करो। 


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