गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

अतीत -- कविता

 अतीत को छोड़ो और, 

 आज और कल की सोचो।

 जो बीत गया सो बीत गया,

 खामखां अपने बाल न नोचो। 

 होना था उसे कोई रोक ना सके,

 कुछ कर ना सके कुछ टोक न सके। 

   कोशिश कितने ही करो रोकने की,

  लेकिन किस्मत थी वही भोगने की।

 बीते हुए कल की चिंता करना है व्यर्थ,

 सोचो कमजोर नहीं है हम हैं  पूर्ण समर्थ।

 आने वाले कल को संभाल लेंगे संवार लेंगे,

अपने आपको उस सदमे से निश्चित ही उबार लेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें