होता यह गर स्कूल मैं नहीं जाता,
समझ लो मैं अनपढ़ ही रह जाता।
मम्मी मेरी अल सुबह ही उठ जाती है,
उठकर जल्दी ही हमारा टिफिन बनाती है।
पीली यूनीफॉर्म पहिन कर हम तैयार हो जाते हैं,
और पीला ही स्कूल बैग कंधों पर टांगते हैं।
मम्मी का हाथ पकड़कर हम दोनों चल देते हैं,
लेकिन आगे-पीछे और दाएं-बाएं भी देखते हैं।
पढ़-लिख कर हम पढ़े लिखे हो जाएंगे,
और छोटे बच्चे से एक दिन ऑफिसर हो जाएंगे।
शिक्षा से ही हम इंसान बन पाएंगे,
वरना तो ऐसे ही गंवार रह जाएंगे।
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