मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

जीने का अंदाज- कविता

 भुला कर हर बात,नई जिंदगी शुरू कीजिए,

 जो कुछ बुरा हुआ उसे बस दफना दीजिए।

 समझ लीजिए वह एक बुरा सपना था,

 वह तो मात्र कल्पना थी कहां अपना था। 

 फिर से अजनबी बन कर, फिर से मिलिए,

 और फिर कदम से कदम मिलाकर साथ चलिए।

  मेरे जीने का अंदाज तुम्हें भी भा जाएगा,

 सुख जो दूर था वह पास आ जाएगा।

 गमों में चूर रहने की जरूरत क्यों है,

 आखिर उनसे रूबरू होने की फ़ुरसत क्यों है।

 कल जो हुआ सो हुआ, जाने दो,

 भूल जाओ , जो हुआ उस फसाने को।

 अब हमें कल को खुशनसीब बनाना है,

 दुखों की काली परछाई को दूर हटाना है।

 आने वाले कल के लिए ताना-बाना बुनना है

  जीवन के विशाल समंदर से हमें मोती चुनना है। 

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