सुंदरलाल जी को पूरी आशा थी कि पहली लड़की के बाद अब उनके घर में लड़के का ही आगमन होने वाला है। उनकी पत्नी के पेट का आकार देखते हुए कुछ जानकार महिलाओं का यही कहना था। लेकिन हुआ वही जो विधाता को मंजूर था, घर में दूसरी लड़की ही आ गई।सुंदर लाल जी को थोड़ी मायूसी तो हुई लेकिन उनकी पत्नी मोहिनी जी ने कहा कि कोई बात नहीं लक्ष्मी ही तो आई है। सब अपना भाग्य अपने साथ लेकर आते हैं। सुंदरलाल जी की एक सरकारी विभाग में साधारण नौकरी थी लेकिन उनकी आय से घर का खर्च आराम से चल जाता था। होनी को कुछ और ही मंजूर था 2 साल बाद ही उनको गंभीर बीमारी हुई और वह चल बसे। उनकी जगह उनकी पत्नी मोहिनी को विभाग में नौकरी मिल गई और इस तरह घर परिवार का खर्चा चलता रहा। दोनों बेटियां अच्छी पढ़-लिख गई थीं। बड़ी बेटी की शादी एक अच्छे परिवार में हो गई।कुछ वर्षों के बाद छोटी बिटिया के लिए भी रिश्ता आया। लड़का और उसके माता-पिता उसे देखने आए हुए थे। अन्य औपचारिकताओं के बाद बिटिया से पूछा गया कि तुम क्या चाहती हो, तो उसने कहा कि मेरा स्पष्ट विचार है की शादी के बाद हम लोग यहां, मेरी मां के साथ रहेंगे। ये यहां पर घर जमाई नहीं बल्कि बेटा बन कर और मैं बेटी नहीं बल्कि बहू बनकर मां की सेवा करेंगे और इस तरह से जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाएंगे। किसी के पास भी, ना करने का कोई अवसर नहीं था।
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