शनिवार, 22 अप्रैल 2023

धरती करे पुकार-- कविता (संशोधित)

 जन्म दात्री इस माटी का सम्मान करें,

सर्वप्रिय है जो देश हमें उसका गुणगान करें।

 आजाद हिंद के होंं सिपाही सेवा देश की कर जायें,

 मोह रहे न तन का प्राण न्योछावर कर जायें।

 गुलशन बन जायें हम भी देश में लायें बहार ,

पूर्ण धरा पर हरियाली कर दें धरती करे पुकार।


 मातृभूमि के जन-जन को नूतन जीवन दान करें,

 पाठ पढ़ायें ऐसा उनको भारत पर अभिमान करें।

 हटेंं ना पीछे कभी भी हम काम निराला कर जायें,

 हो जायें चाहे शहीद नाम देश का अमर कर जायें।

  बन जायें हम सब डोली उठाने को कहार,

उठाएं खुशहाली की डोली फिर धरती करे पुकार ।


 सर्वत्र देश का नाम हो ऐसा हम अभियान करें,

  सर्वमुखी प्रतिभा फैले जग में ऐसा हम अरमान करें।

 आभा से हो जाए पूर्ण सेवा ऐसी करते जायें,

सुवासित हो उपवन यह खून से इसे सींचते जायें।

 रोक न सके हमें नदियों की मझधार ,

 नैया देश की पार करें धरती करे पुकार।


वीर शहीदों ने सींचा इसको हम इसकी रखवाली करें,

संपन्नता से हो जाए पूर्ण फिर रोज हम दिवाली करें।

 ना रहे भूख कहीं भी अन्न इतना उपजायें,

 आंख उठाये दुश्मन जो सीमा पर डट जायें ।

गीत गायें और करें खुशहाली की नौका विहार ,

भारत मां के लाल हैं हम धरती करे पुकार।

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