गुरुवार, 13 अप्रैल 2023

कुत्ते जैसी जिन्दगी चाहिए- लघुकथा(संशोधित)

 फटे पुराने कपड़े पहने हुए, बाल पूरी तरह बिखरे हुए, कई दिनों से नहीं नहाया हुआ, वह बालक टकटकी लगाए गाँव में हो रही शादी के   मुख्य दरवाजे के पास खड़ा हुआ था, जहां एक शादी का भोजन चल रहा था।लोग तरह-तरह के पकवान अपनी प्लेट में लेकर स्वाद से खाए जा रहे थे।वह सोच रहा था कोई तो ऐसा हो जो एक प्लेट में सारे नहीं तो कुछ ही,  रख कर मुझे दे जाए ।उसकी सोच भंग हो  गयी , जब दरवाजे पर खड़े गार्ड ने डंडा घुमाते हुए उसको वहां से भाग जाने के लिए कहा । वह वहां से चल दिया लेकिन आगे जाकर रुक गया जहां पर बची हुई जूठन फेंकी जा रही थी । उसने देखा कि एक कुत्ता वहां पर कुछ खा रहा था। बच्चे ने सोचा कि मेरे खाने लायक भी जरूर होगा। मैं भी खा सकता हूं, यह सोचकर वह जूठन में से कुछ उठाकर खाने लगा। वहाँ से गुज़रते हुए कुछ संभ्रांत व्यक्तियों ने जब उस बच्चे को झूठन खाते हुए देखा तो उन्हें लगा कि यह खाकर बच्चा बीमार पड़ सकता है। यह सोच उन्होंने उसको वहां से भगा दिया। बच्चे की आंखों में आंसू आ गए ,रोते हुए उसने भगवान से कहा- हे भगवान तूने मुझे कहां लाकर डाल दिया ,न अंदर  खाने को मिलता है और न बाहर। कुत्ते से बढ़कर क्यों दी मुझे , कम से कम कुत्ते जैसी जिंदगी तो देता, उसके साथ,मैं भी खाता और कोई नहीं भगाता। 

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