शनिवार, 8 अप्रैल 2023

मुसाफिर हूं- कविता (संशोधित)

 मुसाफिर हूं यारों मुझे चलते रहना होगा,

कई  कई मुश्किलों से लड़ना होगा।

 बाधाएं तो राहों में आएंगी अनेक,

 हौसले से बाधाओं को पार करना होगा।

 मुश्किलों में जो डालना चाहें हमें,

  उन्हें सबक सिखाना होगा।

मंज़िल तक पहुंच गए ग़र,

 तो ध्येय पूर्ण हमारा होगा।

 सपना देखना भला किसे बुरा लगे,

 बुरे सपने से नहीं डरना है,

मन में उत्साह भरा ग़र,

सपना पूरा अपना होगा। 

मंजिल कितनी भी दूर ही सही,

 अनंत तक तो नहीं चलना है।

 चलते रहना है, बस चलते रहना है 

  और अंततः अपनी मंजिल तक पहुंचना है।

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