हवाओं में महक बस हमें चाहिए।
फ़िज़ाओं में बहक बस हमें चाहिए।।
दिलों में बुझी यह आग क्यों है।
मौजों में रवानी बस हमें चाहिए।।
दिलों में जगह बस हमें चाहिए।
जान के लिए साँस बस हमें चाहिए।।
और क्या मांगूं तुझसे जाने जां।
जीने की आस बस हमें चाहिए।
उठ जाग पथिक अब भोर भई,
सोवत सोवत अंधियारी रात गई।
हरि भजन कर कुछ कसरत कर,
तुझे अब करने हैं काम कई।
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