किसी को किसी ने कभी कुछ सिखाया ही नहीं,
क ख ग से आगे कभी लिखाया ही नहीं।
अपने आप को बड़े शेर खान समझते हैं,
और पाला पड़ जाए तो पतली गली से निकलते हैं।
जो जी में आया,जब आया बोल दिया,
नहीं बोलना था लेकिन मुँह खोल दिया।
अब कौन समझाए इनको क्या करना चाहिए,
वैसे तो सबको तोल-मोल कर बोलना चाहिए।
पहले सुनो फिर चिंतन-मनन करो,
इसके बाद ही फिर बोलने का प्रयत्न करो।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें