सोमवार, 5 दिसंबर 2022

क्या रखा है रूठने मनाने में

 अजी,क्या रखा है रूठने मनाने में,

 क्यों हिचकिचाते हो प्यार जताने में।

 हमने तो चाहा है बस तुम्हें ही,

  फिर कोई कैसा भी हो जमाने में। 


 तुम्हारे नाम की ही माला जपती हूं,

 बस तुम्हारा ही पाठ हर दिन पढ़ती हूं।

 दिल जो खाली खाली था अभी तक,

 उसमें बस तुम्हें ही बसाया करती हूं।


 गर रूठ भी जाओगे तो क्या करोगे,

 मुझे छोड़कर और कहां जाओगे। 

 तुम्हारी आंखों में मेरा ही अक्स होगा,

 जहां भी जाओगे मुझे ही पाओगे।


 छोड़ दीजिए यह रूठने की आदत,

 न कीजिए मुझसे कोई भी खिलाफत।

 मेरी बात का कर लो पूरा यकीन,

  मुझे समझिए बस अपनी ही अमानत।

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