मंगलवार, 13 दिसंबर 2022

रेलवे प्लेटफार्म -- लघु कथा

 नकुल की पत्नी आज ही मायके से वापस आने वाली थी । वह उसे लेने के लिए स्टेशन पर आया हुआ था। वह ट्रेन जिससे उसकी पत्नी आ रही थी लगभग एक घंटा देरी से आने वाली थी ,उससे पहले ही दूसरी ट्रेन आकर प्लेटफार्म पर आकर  रुकी। उसने  देखा कि लोग धड़ाधड़ ट्रेन से उतर रहे हैं और कुली को आवाज देकर सामान उस पर लाद रहे हैं।उसे उन कुलियों पर बड़ा तरस आया,बेचारे कहां-कहां से आकर दुनिया का बोझ उठा कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। एक कुली के सिर पर बिस्तरबंद देखकर उसे बड़ी हंसी आई , आज के जमाने में भी लोग बिस्तर साथ लेकर चलते हैं। वह प्लेटफार्म पर चहलकदमी करने लगा।समय बिताने के लिए एक बच्चे से अखबार खरीद लिया पास ही एक बच्चा,बूट पॉलिश करने वाला,खाली बैठा हुआ था।उसने अपने जूतों की तरफ देखा और पाया कि उसके जूतों की चमक भी स्वयं के चेहरे की जैसी हो गई थी , पत्नी जो न थी इतने दिनों से। तो उसने उस बच्चे से कहा-ले भाई मेरे चेहरे पर तो चमक आने ही वाली है, तू इन जूतों को भी चमका दे। बच्चा जूतों को चमकाने लगा और वह अखबार पढ़ता रहा। उसके मन में विचार आया कि एक  छोटा बच्चा अखबार बेच रहा है और दूसरा बूट पॉलिश कर रहा है,उसे उन पर तरस आया।जब पूछा तो मालूम हुआ कि दोनों भाई-भाई हैं और परिवार के पालन-पोषण के लिए यह कार्य कर रहे हैं।

 नकुल सरकारी कार्यालय में बड़ा अफसर था उसे मालूम था कि गरीब बच्चों और परिवार के लिए बहुत सी सरकारी योजनाएं हैं लेकिन ये योजनाएं सभी तक नहीं पहुंचती। उसमें उन बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की और गरीब परिवार के लिए भी मासिक सहायता राशि उपलब्ध कराई।

 बच्चे स्कूल में पढ़ने लगे थे और परिवार में संतुष्टि का आगमन हुआ। उधर वह ट्रेन भी आ चुकी थी जिसमें उसकी चमक यानी पत्नी आ रही थी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें