गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

कैद हूं इस शोर में -- कविता

 कैद  हूं इस शोर में,

 आवाज कोई मिलती नहीं।

 कोई कहना चाहे कुछ भी,

 फरियाद कोई मिलती नहीं।


  झंझावातों के आते इस दौर में,

  कोई भी कली खिलती नहीं।

 बाधाएं अनेक है जीवन में,

 कोई राह अब मिलती नहीं।


  आसमाँ में बिजली चीखती,

   धरती पर शोर घनघोर है।

   उजाले की राह तकते,

   अंधेरा हर ओर है।


   काया तो मानव की पाई,

   पर भाग्य नहीं किसी ठौर में,

    कोई तो सुन ले मेरी,

    कैद हूं इस शोर में।

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