रविवार, 4 दिसंबर 2022

हौसला-- कविता

 हौसला ही तो नहीं था उसमें,

 वरना वह क्यों पीठ दिखाता।

 बड़ी-बड़ी बातें करने वाला,

 सीना तान कर खड़ा हो जाता।


 हमने देखे ऐसे ऐसे बरखुरदार,

 होते हैं जमीन पर बातें आसमान की। 

  खुद के बारे में तो ज्यादा जानते नहीं, 

और बात करते हैं सारे जहान की।


   सुनो आसमान में उड़ने वाले,

  अपनी जमीं पर ही रहा करो ।

 अरे भाई खुद  हौसला न रखो तो,

  दूसरों का हौसला अफजाई किया करो।

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