गुरुवार, 15 दिसंबर 2022

तोल मोल कर बोलना- कविता



सिल दो मेरे होठों को यदि नहीं सुनना है तुम्हें,

 जो तुम्हें अच्छी लगे वह बात नहीं करनी है मुझे।

 जो बात अच्छी हो वही मैं कहूंगा 

 चाहे मुझे कितना भी सितम पड़े सहना।


यदि तुम हमारे धर्म ग्रंथ पढ़ लेते,

 क्या है सही क्या गलत समझ लेते।

 मेरी बातों को गलत मानकर,

यूंही किसी भ्रम में नहीं पड़े रहते।


 बेहतर होगा अपने आपको आईने में देखना,

 पहले जरूरी है अपने आप को परखना।

यदि तुम अपने अंतर्मन से डरोगे,

 मेरा मूंह बंद करने की गलती  नहीं करोगे।


हम सबको  चाहिये तोल मोल कर बोलना,

मीठे बोलों से जग में सुख से रहना।

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