गुरुवार, 15 दिसंबर 2022

प्रभु वंदना-' कविता

 प्रभु मेरे कैसे-कैसे जतन करूं,

 कि आपकी कृपा मैं पा जाऊं।

 भक्ति आपकी करूँ इतनी,

 कि आपकी निगाह में आ जाऊं।

 या तो पुष्पमाला बनकर,

आपके गले को सजाऊं।

  या फिर पुष्प ही बन कर, 

 आपके चरणों में गिर जाऊं।

 सारा जग गुणगान करे महिमा तेरे नाम की,

 जो कोई अपनी ही करें नहीं किसी भी काम की।

  हे प्रभु ऐसी राह दिखा दे हमें,

  जो भी जग में हम करें वही हो काम की।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें