शनिवार, 28 जनवरी 2023

सावन आया-- कविता



सावन आया जानकर मन में उठी तरंग,

 हिय माही भर गए भांति भांति के रंग।


 उपवन में छा गई मस्त-मस्त बहार,

 जैसे गीतों में सज गई राग मल्हार। 


 अमवा की डाल पर पड़ गए हैं झूले,

 झूले में झूला झूलते कष्ट सभी ही भूले।


 सखी सहेली सब मिलकर करे हंसी ठिठोली,

 आंगन में जैसे सज जाये मनभावन रंगोली।


पिया जब तू मिले होठ गुलाबी,गाल हो जाएं लाल,

प्यार से सरोबार हो जाए दिल, नहीं रहे मलाल।


 पिया इस सावन में झूला झूलूं तेरे संग में,

 प्रेम की धारा बह जाए मेरे रग-रग में।

Mssa/ kalkkj 

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