हरी भरी धरती पर बहती
निर्मल पावन जल धारा
यह जलधारा खेतों में बहती,
मिलता अन्न भरपूर हमारा।
पूरब से जब उगता सूरज,
लालिमा छा जाती नभ में।
प्रभात किरणों से जगमग होता,
उजियारा हो जाता जग में।
दिन के उजियारे की ऊर्जा,
तन-मन में साहस भर देती।
मन में जो करने को होता
ऐसा करने को प्रेरित करती।
सूरज चांद सितारे से नभ,
चम-चम चमकता रहता।
ऐसा भारत देश हमारा ,
हमको सबसे प्यारा लगता।
जिस देश में हमने जन्म लिया,
उस भारत पर हमें अभिमान।
लहर लहर लहराता तिरंगा,
है यही तिरंगा हमारी शान।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें