मंगलवार, 31 जनवरी 2023

साथ निभाने का वादा-कविता

इस तरह से दूर दूर रहकर,

 क्या सताने का इरादा किया है तुमने। 

 अपने वादे से कभी मुकर न जाना तुम 

 देखो साथ निभाने का वादा किया है तुमने।


 रुख से रुख तो मिलाती नहीं हो,

 आंखें चुराती हो फिर झुकाती हो।

  मौन की भाषा यों अपना कर,

  आखिर कहना क्या चाहती हो।


 मेरा दिल तो एक मकान है,

  इसे कभी सराय न समझना।

  मैं अपने दिल को समझा ही लूंगा

  लेकिन तुझे भी तो पड़ेगा तड़पना।


 बात को पकड़ कर बैठे रहना ठीक नहीं

, छोड़ो सब यह बीते कल की बातें। 

  गिले-शिकवे सभी  भुला कर,

 फिर शुरू कर दें अपनी मुलाकातें।



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