तुम उस वक्त आना प्रभुजी जब प्रलय हो निकट,
अभी तो धीरे-धीरे स्थिति को हो जाने दो विकट।
अभी तो मानव रंगा हुआ है अपने ही रंग में,
कोई सदाचार दिखता नहीं उसके जीने के ढंग में।
अभी उसे अपने अहम में खो जाने दो,
जो होना चाहता है उसे हो ही जाने दो।
तुम उस वक्त आना प्रभुजी जब हो जाए अति,
और प्रहार करना ऐसा कि मारी जाए उसकी ऐसी मति।
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