ज़ज्बात जिंदगी और गम,
जिंदगी के साथ चलते रहेंगे।
न छोड़ पाएंगे हम किसी को,
किसी मोड़ पर मिलते रहेंगे।
इंसान है तो ज़ज्बात हैं,
हर दिल इनको सजाता है
ज़ज्बात हैं,मन के भाव हैं।
इनके साथ ही जिंदगी बिताता है।
जिंदगी तो बिना मांगे मिलती है,
चाहे न चाहे दुनियां में आ जाती है।
जिंदगी को जिंदादिली से जी लें,
तो खुशियों की बगिया खिल जाती है।
सीधे सपाट राहों पर चलते चलते,
कभी और कहीं कांटे मिल जाते हैं।
ग़म भी इसी इन्तज़ार में रहते हैं,
मौका मिला और लिपट जाते हैं।
जब इस दुनियां में आ ही गये हैं,
हर हाल में जीना ही पड़ेगा।
ज़ज्बात जिंदगी और ग़म से
अनचाहे भी नाता जोड़ना ही पड़ेगा।
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