शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

मेरी खुशी तुम हो-- कविता

 जिसके लिए तरसता रहा वह मेरी खुशी तुम हो,

 जो जिंदगी अब तक न मिली वह जिंदगी तुम हो।

 जिसके संग संग मैं चलूं वह कारवां तुम हो,

 जिंदगी जी लूं जहां सुकून से वह जहां तुम हो।

 तुम चांद सी बादलों की ओट में छुप जाती हो,

 चांदनी को जैसे छुपा अंधेरा घना कर जाती हो।

 अब तो आकर नजरे मिला लो मुझसे,

 नहीं रहेगा मुझे कोई भी गिला शिकवा तुझसे।

 हटा दो मेरे चेहरे पर छाई ये उदासी की लकीरें,

 हम तो चाहें हमें तो जकड़ लें प्यार की जंजीरें।

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