शुक्रवार, 20 जनवरी 2023

क्यों अपने चले जाते हैं- कविता


दिल के दर्द किसी को सुनाई नहीं देते, 

 कितने अंगारे हैं दिल में दिखाई नहीं देते। 


खुशियों का ठिकाना अब हमें मिलता नहीं,

 सुकून भरा दरवाजा अब खुलता नहीं।


साथ साथ थे, इक दूजे के पास पास थे,

संदेह का तो कतरा भी नहीं एक दूसरे के विश्वास थे।


तुम्हारी बात हमें कभी भी दिल में नहीं चुभी, 

 लेकिन अब क्यों दिखा दी तुमने इतनी बेरुखी।


 दिल के दर्द आंसू बन आंखों में उतर आए हैं,

 छुपाना कितना भी चाहा छुपा नहीं पाये हैं।


 अब तो अपने आप को हर समय कोसते हैं,

 और कोसते कोसते हम हर घड़ी सोचते हैं।

 

 क्यों छोड़कर हमें अपने चले जाते हैं,

 दर्द आंसू से क्यों नयन भीग जाते हैं।


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