मंगलवार, 3 जनवरी 2023

चाँद (अनुप्रास अलंकार)--कविता

चम चम सी चमकती चंदा की चांदनी में,

चकोर बन चंचल मन चितचोर हुआ।

चारों दिशाओं से चकोर चहकने लगा,

 चकरा कर चित्त ने तुझे चाहा तेरा हुआ।


मन मेरा मोह लिया मन मोहिनी ने,

मेरे मन मंदिर में मूर्ति बन समा गई।

मैं मंत्र मुग्ध हो मोहपाश में बंध गया,

मंज़िल मेरी यही मनमीत मुझे बता गई।

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