बीवी के घर में रहते,
हम भीगी बिल्ली बन जाते हैं।
उसकी अनुमति के बिना,
कुछ भी नहीं कर पाते हैं।
रह रह कर वह,
बड़ा रौब जमाती है।
हम विद्यार्थी और वह,
हेड मास्टरनी बन जाती है।
दंड देने के लिए कभी खड़ा करती।
कभी उठक-बैठक भी लगवाती है।
हमने सोचा जिंदगी भर न सही,
एक दिन तो खुलकर जिया जाए।
'आईडिया' आया बीवी को,
मायके भेज दिया जाए।
हमने ऐसा ही किया ,
और फिर दोस्तों को फोन किया।
चलो ना पार्टी-शार्टी का इंतजाम किया जाए,
बीवी गई है मायके क्यूँ ना इंजॉय किया जाए।
पार्टी चल ही रही थी कि अचानक,
घर की घंटी घन-घन घननाई,
दरवाजा खोला तो,
सामने बीवी नजर आई।
उसे देखते ही फिर,
हम भीगी बिल्ली बन गए।
वह बोली तुम कैसे,
दिखावटी शेर बन गए।
हमने पूछा अच्छा बताओ,
तुम वापस कैसे आई।
उसने कहा तुम्हारे किसी,
विभीषण ने खबर पहुंचाई।
आगे क्या हुआ होगा,
आप समझ सकते हो।
समझ नहीं आया तो,
कविता दोबारा पढ़ सकते हो।
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