जब मन में लालच आ जाता है तो ज्ञान का प्रवेश बंद और अज्ञान का आगमन हो जाता है। आनंदपुर गांव के जमींदार के साथ भी ऐसा ही हुआ।
एक पंडित जी ने उनको बताया कि उनकी धनसंपदा में अत्यंत वृद्धि हो सकती है यदि वे देवी के एक मंदिर की स्थापना उपयुक्त स्थान पर करें। बात धनसंपदा की थी तो जमीदार ने तुरंत अपने कारिंदे को बुलाया और उन पंडित जी को साथ में लेकर उपयुक्त स्थान तलाश करने के लिए भेज दिया। पंडित जी ने कुछ ही समय में एक स्थान तय करके बता दिया।अगले ही दिन ज़मींदार ने वहां के पेड़-पौधे काटकर जमीन साफ करने के लिए भेज दिया।यह बात जब पास में रहने वाले परिवार को मालूम हुई तो वे चिंतित हुए और उन्होंने इसका विरोध करने की ठानी। उस घर की महिला उस बड़े पेड़ के पास गई जिसे काटने की तैयारी थी और उससे लिपट गई।उसने कहा कि यहां कोई पेड़ नहीं काटना चाहिए ,देखते नहीं पेड़ और पौधों से कितनी हरियाली हो रही है। इस हरियाली से हमें शुद्ध हवा मिलती है। पेड़ों और हरियाली की वजह से कितने ही मोर और अन्य पक्षी यहां विचरण करते हैं। आपको ऐसा करते देख उसकी दोनों बच्चियां भी आ गईं और वे भी पेड़ से लिपट कर पेड़ काटने वाले को बार-बार ऐसा करने के लिए मना करने लगीं। जब पेड़ काटने वाले व्यक्ति को और भी कई व्यक्ति उधर आते हुए दिखे तो वापस जमीदार के पास गया और उनको कहा कि वहां पर भारी विरोध हो रहा है और उनका कहना है कि पर्यावरण की रक्षा करना बहुत जरूरी है इसलिए पेड़ ना काटा जाएं। जमीदार ने पंडित जी को दूसरी खाली जमीन तलाश करने को कहा और इस तरह से वहां पर मौजूद पेड़ों और हरियाली की रक्षा हो गई।
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