बिटिया किसी की आज बहू बन कर आई है,
बड़ी मुद्दतों के बाद यह घड़ी आई है।
पहली बार यह घर में प्रवेश कर रही है,
आज से यह घर की अहम सदस्य बन रही है।
बड़े सपने पाले होंगे उसने अपने मन में,
बहार जरुर आएगी उसके नये चमन में।
नहीं सोचा था उसने घर से विदाई होगी,
एक दिन अपनों से ही पराई होगी।
बाबुल का घर यूं छोड़ना पड़ेगा,
फिर एक नये आशियाने मे जाना पड़ेगा।
दुनियां के रस्म और रिवाज तो निभाने होंगे,
जो पराये थे वे अपने बनाने होंगे।
अब यही मेरा घर मेरा ज़माना है,
सारी उमर सारा समय यहीं बिताना है।
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