हर हाल में रखा ख्याल लेकिन फिर भी,
बहार में फूल मूरझा गए बागान में।
दिल की धड़कन में छुपा कर रखा था तुम्हें,
और तुम खो गए कहीं जहान में।
मजबूरी कुछ तुम्हारी कुछ हमारी भी होगी,
जानता हूं मजबूरी यूं ही नहीं हुआ करती।
सुबह से शाम तो होती ही है लेकिन,
शाम इतनी जल्दी ढ़ला नहीं करती।
खुशबू मिले गुलाब की ऐसी चाहत थी मेरी,
नीयत फिर तुम्हारी अचानक कैसे बदल गई।
चमन फूलों का आकर सपनों में इतरा रहा था,
और तुम आकर के चमन में कांटे बो गई।
आसमान में बादल घटा बन छाने लगे,
पक्षियों की चहचहाहट मधुर रागिनी सी लगी।
और तुम बादलों की ओट में छुप कर जैसे,
मुझसे लुकाछिपी सी खेलने लगी।
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